Madine Ke Aaqa Salamun-alaik Naat Lyrics

 

 

मदीने के आक़ा सलामुन-अ़लैक
दो आलम के दाता सलामुन-अ़लैक

ज़मीं में मुहम्मद, ज़मां में मुहम्मद
मकीं में मुहम्मद, मकां में मुहम्मद
हर इक शय में जल्वा रसूल-ए-ख़ुदा का
सलामुन-अ़लैक, सलामुन-अ़लैक

मदीने के आक़ा सलामुन-अ़लैक
दो आलम के दाता सलामुन-अ़लैक

गुनाहों ने गेरा, ख़ताओं ने गेरा
मुसीबत ने गेरा, बलाओं ने गेरा
बचा लीजिएगा, बचा लीजिएगा
सलामुन-अ़लैक, सलामुन-अ़लैक

मदीने के आक़ा सलामुन-अ़लैक
दो आलम के दाता सलामुन-अ़लैक

हमारी भी क़िस्मत बना दो नबीजी
नसीबां भी सोया जगा दो नबीजी
हमें अपना रोज़ा दिखा दीजिएगा
सलामुन-अ़लैक, सलामुन-अ़लैक

मदीने के आक़ा सलामुन-अ़लैक
दो आलम के दाता सलामुन-अ़लैक

न दौलत तलब है, न शोहरत तलब है
हुकूमत तलब है न इज़्ज़त तलब है
हमें दीजिएगा काली कमली का साया
सलामुन-अ़लैक, सलामुन-अ़लैक

मदीने के आक़ा सलामुन-अ़लैक
दो आलम के दाता सलामुन-अ़लैक

हूँ मोहताज में आप की इक नज़र का
फ़िदा आप पर मेरे माँ-बाप, आक़ा !
अरशद पे नज़र-ए-करम कीजिएगा
सलामुन-अ़लैक, सलामुन-अ़लैक

मदीने के आक़ा सलामुन-अ़लैक
दो आलम के दाता सलामुन-अ़लैक

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