दुरूद पड़ते हुवे जब भी इब्तिदा की है Lyrics

दुरूद पड़ते हुवे जब भी इब्तिदा की है Lyrics   दुरूद पड़ते हुवे जब भी इब्तिदा की है नवाज़िशों की मेरे रब ने इन्तिहा की है दुरूद पड़ते हुवे जब भी इब्तिदा की है ये आफ़ताब, ये मेहताब, केहकशां, अन्जुम जो रोशनी है जहाँ में वो मुस्तफ़ा की है दुरूद पड़ते हुवे जब भी इब्तिदा …

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