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ख़याले नबी में जीये जा रहा हूँ
यूँ ख़ुद को मुनव्वर कीये जा रहा हूँ…!
बहारे मदीना मदीने की खुशबू
सभी अपनी जानिब लीये जा रहा हूँ…!
तसव्वुर में देखा मदीने के अन्दर
मैं ज़मज़म का पानी पीये जा रहा हूँ…!
गुनाहों के कपड़े बदन से हटा कर
लिबासे मोअत्तर सीये जा रहा हूँ…!
मुसल्ला बीछा कर हरम की ज़मीं पर
मैं सजदे पे सजदे कीये जा रहा हूँ…!
Sallalaho Ta’ala Alaihi wa sallam