Maa Bhi Na Ho Duniya Me Aur Baap Bhi Mar Jaye Noha Lyrics

 

एहसास-ए-यतीमी है वीरां है अली का घर

बिन बाप की ये पहली रात आई है बच्चों

रोती थी कहीं ज़ैनब शब्बीर कहीं शब्बर

फिज़्ज़ा ने ये देखा तो कहने लगी रो-रोकर

मां भी ना हो दुनिया में और बाप भी मर जाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

मां भी ना हो दुनिया में और बाप भी मर जाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह

 

ये रात ख़ुदा जाने किस हाल में गुज़रेगी

बच्चों की निगाहों में तस्वीर है बाबा की

बाबा से जुदा होकर किस तरहं जिया जाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

मय्यित जहां रक्खी थी ज़ैनब वहीं बैठी है

अब्बास के चेहरे को अब देख के रोती है

कहती है कोई मेरे बाबा को बुला लाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

हाथों में रुकईया के बाबा का मुसल्ला है

कुलसूम के हाथों में बाबा का अमामा है

बाबा नहीं आएंगे अब कौन ये बतलाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह

 

मां याद जो आए तो हो आते थे तुर्बत पर

रुख़सत किया बाबा को हसनैन ने ये कहकर

मिलने कहां जाएंगे जब बाप की याद आए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

अब मुझको रुलाता है शाहज़ादी का वो कहना

फिज़्ज़ा मेरे बच्चों से तुम दूर नहीं रहना

मां बाप के बिन जीना मुश्किल है बहुत भाई

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

इस आलम-ए-ग़ुर्बत में मां ज़िन्दा अगर होती

बिन बाप के बच्चों को सीने से लगा लेती

आग़ाज़-ए-यतीमी है दिल ग़म से ना फ़ट जाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

भूली हैं कहां ज़ैनब वो चूमना शानों को

जब शाम में देखेगी रस्सी के निशानों को

याद आएगी बाबा की उस वक़्त बहुत भाई

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

जीशान-ओ-रज़ा हाय ! नोहा था ये फ़िज़्ज़ा का

अब बेटियों के सर पे साया नहीं बाबा का

मुश्किल है यतीमों पे ये रात गुज़र जाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

मां भी ना हो दुनिया में और बाप भी मर जाए

अल्लाह किसी पर भी ये वक़्त नहीं आए

 

By sulta