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क़िब्ला-ए-बरकात हैं या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर

क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़ाज़ी-उल-हाजात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क्या मेरी औक़ात है, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
आप की सब बात है, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
रोज़-ओ-शब यूँ लम्हा लम्हा आप के दरबार में
नूर की बरसात है, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
आज तक दुनिया ने देखा आप के इक नाम से
काँपते जिन्नात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
जो तिराए डूबी कश्ती और भर दे झोलियाँ
आप महव-ए-ज़ात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
मुझ को दामन से, ए बेख़ुद ! मग़्फ़िरत की बा-ख़ुदा
मिल गई सौग़ात है, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़िब्ला-ए-बरकात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !
क़ाज़ी-उल-हाजात हैं, या ग़ौस-ए-आ’ज़म दस्त-गीर !

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