क़ादरी आस्ताना सलामत रहे

 
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
ग़ौस का शामियाना सलामत रहे
जिस ने तहसीन की ख़त्म तासीर की
उस का सारा घराना सलामत रहे

क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
है क़यामत तलक हर ज़माना तेरा
तेरा हर एक ज़माना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
पल रहे हैं जहां से ये दोनों जहाँ
वो सख़ी आस्ताना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
हुक्म था के अदा हो नमाज़ें पचास
आप का आना-जाना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
दर्दमंदों के सर पर हैं साया-फ़िगन
आप का शामियाना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
इतरते-फ़ातिमा पर उजागर निसार
सैयदां का घराना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे

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