शाहे हिन्दल वली तुमहो  ख्वाजा

 
शाहे हिन्दल वली तुम हो ख्वाजा
ख़्वाजा मेरे ख़्वाजा, ख़्वाजा मेरे ख़्वाजा
अब किरपा करो ख़्वाजा, मैं तुमरा भिकारी हूँ
या ख़्वाजा हसन तुमरी चौखट का सवाली हूँ

मुस्तफ़ा के प्यारे लाडले, ख़्वाजा हमें दर पे बुलाले
मुस्तफ़ा के प्यारे लाडले, ख़्वाजा हमें दर पे बुलाले
शाहे-हिन्दल वली तुम हो ख़्वाजा, हम को अजमेर अपना दिखादो
हम तुम्हारे भिकारी हैं ख़्वाजा, चिश्तिया रंग अपना चढ़ादो
लेके आए हैं कश्कोल ख़ाली, तुमरे रोज़े पे सारे सवाली
ऐ मुईने-जहाँ, नूरे-हैदर ! ज़िन्दगी अब हमारी सजादो
शाहे-हिन्दल वली तुम हो ख़्वाजा, हम को अजमेर अपना दिखादो
हम तुम्हारे भिकारी हैं ख़्वाजा, चिश्तिया रंग अपना चढ़ादो
तुम हो वलियों के राजा ऐ ! हिन्दल वली
तुम से फ़ैली है ख़्वाजा यहां रौशनी
हमको अजमेर बुलवालो ख़्वाजा सख़ी
दूर रेहकर कटेगी न ये ज़िन्दगी
शाहे-हिन्दल वली तुम हो ख़्वाजा, हम को अजमेर अपना दिखादो
हम तुम्हारे भिकारी हैं ख़्वाजा, चिश्तिया रंग अपना चढ़ादो
मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया
मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया
तुम अता-ए-रसूले-ख़ुदा हो, हम गरीबों का तुम आसरा हो
सदका पंजतन का संजर के वाली, मेरी बिगड़ी भी ख़्वाजा बनादो
शाहे-हिन्दल वली तुम हो ख़्वाजा, हम को अजमेर अपना दिखादो
हम तुम्हारे भिकारी हैं ख़्वाजा, चिश्तिया रंग अपना चढ़ादो
दरे-ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रेहने दो
सर नदामत से झुका है तो झुका रेहने दो
खुद ही फ़रमाएंगे मुजरिम पे वो रहमत की नज़र
मुझको ख़्वाजा की अदालत में खड़ा रेहने दो
मुझको मिल जाएगा सदका मैं चला जाऊंगा
कासा-ए-दिल मेरा क़दमों में पड़ा रेहने दो
सदका पंजतन का संजर के वाली, मेरी बिगड़ी भी ख़्वाजा बनादो
मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया
मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया, मेरे ख़्वाजा पिया
 
मेरे इस दिल की चाहत है अजमेर में
मेरे आँखों की सरवत है अजमेर में
दर्दमंदों की राहत है अजमेर में
हम गरीबों की दौलत है अजमेर में
शाहे-हिन्दल वली तुम हो ख़्वाजा, हम को अजमेर अपना दिखादो
हम तुम्हारे भिकारी हैं ख़्वाजा, चिश्तिया रंग अपना चढ़ादो
ख़्वाजा उस्मां हारूनी के प्यारे, ग़ौसे-आज़म की आँखों के तारे
कर के नज़रे-करम मुझ पे ख़्वाजा, मेरा सोया नसीबा जगादो
शाहे-हिन्दल वली तुम हो ख़्वाजा, हम को अजमेर अपना दिखादो
हम तुम्हारे भिकारी हैं ख़्वाजा, चिश्तिया रंग अपना चढ़ादो
है ये इमरान आजिज़ तुम्हारा, ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगां अब ख़ुदारा
अपने दस्ते-इनायत से प्यारे जामे-उल्फ़त इसे भी पिलादो
शाहे-हिन्दल वली तुम हो ख़्वाजा, हम को अजमेर अपना दिखादो
हम तुम्हारे भिकारी हैं ख़्वाजा, चिश्तिया रंग अपना चढ़ादो
मुस्तफ़ा के प्यारे लाडले, ख़्वाजा हमें दर पे बुलाले
मुस्तफ़ा के प्यारे लाडले, ख़्वाजा हमें दर पे बुलाले

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