यौमे विलादत (पैदाइश) ए आलाहज़रत

यौमे विलादत (पैदाइश) ए आलाहज़रत

 

 

इमाम ए अहले सुन्नत,मुजद्दिद ए दीनों मिल्लत, सैय्यिदी सरकार आलाहज़रत अश्शाह इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल ए बरेलवी अलैहिर्रहमतू व रिज़वान का
मुख्तसर (Short) जीवन परिचय🌹

➡पैदाइश:
तारीख:14/06/1856, ईसवी,
मुताबिक़
10,शव्वाल 1272 हिजरी. दिन :सनीचर

➡वक़्त: ज़ोहर के वक़्त
स्थान : मोहल्ला जसौली बरैली
(उत्तर प्रदेश)

➡अस्ल नाम : मोहम्मद

➡तारीखी नाम :अलमुख़्तार,
आपके
दादा जान :अहमद रज़ा के
नाम से पुकार ते थे।

➡खत्म कुरआन मजीद।
4,साल की उम्र मे 1276, हिजरी,
मुताबिक़ 1860ई.

➡पहली तक़रीर:
6,साल की उम्र में,रबीउलअव्वल
1278,हि.1862ई.

➡पहली क़िताब:
शरहे हिदायतुन्नहव।(8,साल
की उम्र में)1280,हि.1864ई.

➡मुसल्लेमुस्सुबूत पर हाशिया,
(10 साल की उम्र में)
1282ही. 1866,ई

➡अरबी भाषा में पहली किताब
13,साल की उम्र में 1285हि.
1868ई.

➡दस्तारे फ़ज़ीलत:13,साल की
उम्र में हुई 1286हि.1869ई.

➡पहला फतवा :
मुफ़्ती मनसब की ज़िम्मेदारी 13,साल 10,माह 4 दिन रज़ाअत के मसअले पर 14 शाबान 1286 हि.1869ई.

➡आग़ाज ए दर्स व तदरीस :
13,साल की उम्र में 1286,हि.
1869ई.

➡इज़्दवाजगी ज़िन्दगी:
18,साल की उम्र में निकाह हुआ।
1291हि.1874ई.

➡पहले साहिबज़ादे की विलादत :
हुज्जतुल इस्लाम हज़रत मौलाना हामिद रज़ा खां साहेब रबीउल अव्वल शरीफ 1292हि.1875ई.

➡फतवा लिखने की इजाज़त: 20,साल की उम्र में आपके वालिद शैखुल इस्लाम हज़रत अल्लामा नक़ी अली खां ने आपको फतवा नवेसी की इजाज़त दी 1876ई.

➡बैअत व खिलाफत:
21,साल की उम्र में आप सरकार सैय्यद आले रसूल मारहरवी से मुरीद हुए।
आपके मुर्शिद ने आपको बैअत के साथ साथ खिलाफत से भी नवाजा।1294हि.1877ई.

➡इजाज़ते हदीस:
22,साल की उम्र में शैख़ बिन ज़ैन बिन ज़ैन दहलान मक्की और मुफ़्ती-ए-मक्का शैख़ अब्दुर्रमान से इजाज़ते हदीस मौसूल हुई।
1295हि.1878ई.

➡पहला हज :
1296हि. 1878ई.

➡ज़ियाउद्दीन का लक़ब:
मक्का शरीफ में दिया गया
1296हि 1878ई

➡कियामे फरंगी महल :
लखनऊ 1309हि.1891ई.

➡दूसरे साहिबजादे की पैदाइश: ताजदारे अहले सुन्नत मुफ्तिये आज़में हिन्द हज़रत अल्लामा मुस्तफा रज़ा खां नूरी क़ादरी बरकाती 21,ज़िल्हिज्जा
1310हि.1892ई.

➡जलसा तासीस :
नदवह में शिरकत1311हि.
1893ई.

➡तहरीक नदवह से अलहदगी:
1315हि.1897ई.

➡अल मोअतमद अलमुस्तनद की तसनीफ़ :1320हि.1902ई.

➡फतावा रज़वीयाह की तसनीफ़
1320हि. 1904ई.

➡दारुल उलूम मंज़रे इस्लाम की
बुनियाद 1322हि.1904ई.

➡दूसरा हज:
36 साल की उम्र में ज़िल
क़अदा1323हि.1905ई.

➡तसनीफ़ अद्दौलतुल मककीया
मक्का शरीफ में 8,घण्टा में लिखी गई। रबीउल अव्वल शरीफ
1324हि.1906ई.

➡हुसामुल हरमैन:
1324हि. 1906ई.

➡कियामे बम्बई:
वापसी हज पर रबीउल अव्वल शरीफ 1324 हि 1906ई.

➡कियामे अहमदाबाद:
रबीउल आखिर 1324हि.
1906ई.

➡पोते की पैदाईश:
मुफ़स्सिरे आज़म हिन्द हज़रत अल्लामा मोहम्मद इब्राहिम रज़ा खां जीलानी मियां साहेब बरकाती बरेलवी(रहमतुल्लाह अलैह)
1335हि.1907ई.

➡तर्जुमा क़ुरआन कंज़ुल ईमान: 1330हि.1911ई.

➡क़यामे जबलपुर:
जमादिउल आखिर 1337 हि. 1918 ई.

➡क़याम कोह भवाली:
नैनीताल जून रमज़ान शरीफ
1339हि.1921ई.

➡विसाल शरीफ:
25,सफर 1340हि.1921ई.वक़्त2,38 दिन जुमा,

➡नॉट: सरकार आलाहज़रत की उम्र शरीफ सन ईसवी के हिसाब से 65,साल सन हिजरी के हिसाब से 68,साल,

➡आलाहज़रत का हुलिया:
बचपन में रंग गन्दुमी था,चेहरे पर हर चीज़ निहायत मौज़ू व मुनासिब थी,बलन्द पेशानी,हर दो आंखें,बहुत मौज़ू और खूबसूरत,निगाह में चमक और तेज़ी,अबरू (भौं)कमाले अबरू के मिसदाक। दाढ़ी,बड़ी खूबसूरत,सर मुबारक पर पुट्ठे बाल जो कान की लौ तक थे,सीना चौड़ा,गर्दन सुराही दार और बलन्द ,क़द मियाना।

➡आला हजरत की कुछ
ख़ुसूसी आदतें:
(1)हदीस की किताबों पर दूसरी किताब न रखते।
हदीस की तर्जुमानी के वक़्त कोई बात काटता तो आप नाराज़ व कबीदह खातिर होते।

(2)एक पाओं दूसरे पाओं मुबारक के जानू पर रख कर बैठने को ना पसंद फरमाते,लिखते वक़्त पाओं मुबारक समेट कर दोनों जानू उठाये रखते।

(3)ज़िक्रे मीलाद ए पाक में शुरू से आखिर तक दो जानू रहा करते। ऐसे ही तक़रीर फरमाते तो 4,5, घण्टे दो जानू ही मिम्बर शरीफ पर रहते।

(4)वाज़ करते वक़्त पान हर गिज़ न खाते।

(5)पहले पान बहुत खाते थे अखीर उम्र में पान खाना छोड़ दिया था।

(6)लफ्ज़ “मुहम्मद ” सुनकर सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम) ज़रूर फरमाते (पढ़ते)।

(7)सोते समय जिस्म को लफ्ज़ “मुहम्मद” की शक्ल में कर लेते ।
(8)कभी कहकहा बलन्द न फरमाते।

(9) किब्ला की तरफ रुख कर के कभी न थूकते ,और न किब्ला की तरफ पैर करते थे।

(10)जमाही लेते वक़्त दांतों में उंगली दबाकर आवाज़ पैदा न होने देते थे।

(11)खत बनवाते वक़्त अपना कंघा व शीशा इस्तेमाल करते।

(12)हर काम दाहिने जानिब से शुरू करते।

(13)मिस्वाक करते और सर मुबारक में फुलेल डलवाते।

➡तब्दीली ए लिबास :
हफ्ता में 2,बार जुमा और मंगल को तब्दील फरमाते।
हाँ,अगर जुमेरात को यौमे ईदेंन या यौमुन्नबी पड़ता तो दोनों दिन तब्दील फरमाते।

➡आहिस्ता चलना :
आपके चलने में चाप की आवाज़ कभी सुनने में न आई।

➡खुराक:
आप बहुत ही कम खाते थे एक प्याला बकरी के गोश्त का शोरबा बगैर मिर्च का और या डेढ़ बिसकिट सूजी का वह भी कभी कभी नागा हो जाता था।

📘ब हवाला किताब”आला हज़रत” डॉक्टर अब्दुन्नईम अज़ीज़ी)
मौलाना तुफैल अहमद रज़वी
नाज़िमे अअला
मदरसा गुलशने ज़हरा कांकेर
(छ ग)
नॉट:(1)पम्पलेट बनाकर छपवाया जाए और मस्जिदों में लगाया जाए।

(2)सवाब ए जारिया है।

(3)नोट ⏩ कमी ज़ियादती बिना इजाज़त न करें,

🌷 तालिबे दुआ 🤲👇🌷

🌹-हज़रत मुफ़्ती मुहम्मद ज़ुल्फ़ुक़ार ख़ान नईमी रज़वी साहब क़िब्ला व हज़रत मुफ़्ती मुहम्मद क़ासिम रज़ा नईमी रज़वी साहब क़िब्ला और ग़ुलामे ताजुश्शरिअह अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत-🌹

🌹🌿☘️🌳☘️🌿🌹
🌟-मसलके आलाहज़रत-🌟
🌹 ज़िन्दाबाद 🌹

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