मरने की है तमन्ना ना जीने की आरजू

 
मरने की है तमन्ना ना जीने की आरजू !
दश्ते नबी से जाम को पीने की आरजू !

ईस बेखुदी के साथ निकल जाऐ मेरा दम,
गलियो में यार की ये कमीने की आरजू !
हुस्न तो मिल गया है युसूफ को दोस्तो,
फुलो को मुुस्तफा के पसीने की आरजू !
ईतना हसीन हो जो भरे आंखे नुर से
किस्मत जगा दे ऐसे नगीने की आरजू !
मंजधार में तिरे जो, तुफान से लड़े जो,
डुबे कभी ना ऐसे सफीने की आरजू !
मांगा किसी ने ज़र और मरने के वास्ते
आकर दरे नबी पे किसी ने की आरजू !
खाऐ वतन के नाम पर जो खुद पे गोलिया,
या रब मुझे भी उस ही सीने की आरजू !
जो भी वहां पे मर गया बेखुद, जी गया,
मुझको वहां पे मरके है जीने की आरजू !

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