मदीने को जाएँ ये जी चाहता है

 
 
मदीने को जाएँ ये जी चाहता है
मुक़द्दर बनाएँ ये जी चाहता है
मदीने को जाएँ ये जी चाहता है
मदीने के आक़ा ! दो ‘आलम के मौला !
तेरे पास आएँ ये जी चाहता है
मदीने को जाएँ ये जी चाहता है
जहाँ दोनों ‘आलम हैं महव-ए-तमन्ना
वहाँ सर झुकाएँ ये जी चाहता है
मदीने को जाएँ ये जी चाहता है
मुहम्मद की बातें, मुहम्मद की सीरत
सुनें और सुनाएँ ये जी चाहता है
मदीने को जाएँ ये जी चाहता है
दिलों से जो निकलें दयार-ए-नबी में
सुनें वो सदाएँ ये जी चाहता है
मदीने को जाएँ ये जी चाहता है
पहुँच जाएँ, बहज़ाद ! जब हम मदीने
तो ख़ुद को न पाएँ ये जी चाहता है
मदीने को जाएँ ये जी चाहता है
 

By sulta