मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा

 
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा
जमाले यार की मेहफ़िल से परवाना न जाएगा
बड़ी मुश्किल से आया है पलट कर अपने मर्कज़ पर
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा

ये माना ख़ुल्द भी है दिल बहेलने की जगह लेकिन
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा
नशेमन बांधना है शाख़े-तूबा पर मुक़द्दर का
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा
जो आना है तो खुद आए अजल उम्रे अबद ले कर
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा
ठिकाना मिल गया है फ़ातिहे़-मेहशर के दामन में
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा
फ़राज़े-अर्श से अब कौन उतरे फर्शगीति पर
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा
दो आलम की उम्मीदों से कहो मायूस हो जाएं
मदीना छोड़ कर अब उनका दीवाना न जाएगा
मेरे सरकार आकर नक़्श कर दो अब कफे पा को
दिले-बीमार का रेह रेह के गबराना न जाएगा
पहुँच जाएगा उनका नाम लेकर ख़ुल्द में अरशद
तहि दामन सही नाज़े ग़ुलामाना न जाएगा

Leave a Reply

Your email address will not be published.