उनकी जामे-जम आंखें शीशा-ए-बदन मेरा

 
उनकी जामे-जम आंखें शीशा-ए-बदन मेरा
उनकी बंद मुठ्ठी में सारा बाकपन मेरा
अर्ज़े-गंग भी मेरी है, खित्ता-ए-जमन मेरा
मैं ग़ुलामे-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा

मैं ग़ुलामे-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा
आशिक़े नबी हूँ मैं, वारिसे-अली हूँ मैं
मैला हो न पाएगा हश्र तक कफ़न मेरा
मैं ग़ुलामे-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा
मैंने सारे काम अपने मुस्तफ़ा को सौंपे हैं
क्या बिगाड़ पाएगा दौरे-पुर-फ़ितन मेरा
मैं ग़ुलामे-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा
नाते-मुस्तफ़ा केहना, नाते-मुस्तफ़ा सुनना
मुझको बक्शवाएगा हा ! यहीं चलन मेरा
मैं ग़ुलामे-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा
गुलशने-मदीना से नज़्मी मुझ को निस्बत है
एक एक कली मेरी, गुल मेरा चमन मेरा
मैं ग़ुलामे-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा

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